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भारतवर्ष मे अंग्रेजी अनिवार्य क्यों..?

हिंदुस्तान मे हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी भाषा जरूरी मानी गई है

स्वतन्त्रता के इतने वर्षों के  उपरांत भी हम अंग्रजी के गुलाम बने है।अलग अलग देशों में अपनी भाषा महत्व दिया है लेकिन आज भी भारत देश मे अंग्रेजी भाषा को क्यों महत्व दे रहे है

दुनिया में एक ही देश ऐसा है जहां किसी भी देशी भाषा का प्रयोग वर्जित है।


भारत में हो कर भी हम हिंदी में क्यों नही बात करते हैं अपने देश ही मे विदेशी भाषा क्यों बोलते है... 

भारत मे कई सालों से भाषाई भेद है, अंग्रेजी बोलने वाला व्यक्ति राजा समझा जाता है और बाकी भाषा बोलने वाले प्रजा। अंग्रेजी भाषा को फैशन समझा जाता है कूल समझा जाता है आजकल के बच्चे हिंदी भाषा से लगभग दूर होते जा रहे है


भारत को जहालत में डालने का काम सर्वाधिक इन अंग्रेजी भाषा स्कूल ने किया भारत मे बेकारी की समस्या इन्ही की देन...!!

जापान चीन अंग्रेजी के बिना भी महान और भारत विदेशी भाषा के भरोसे महाशक्ति बनने का सपना नेहरू के समय से पाला हुआ है...!!!

रूस, चीन, जर्मनी ,फ्रांस जापान जैसे देशों मे स्वभाषाओं की रक्षा के लिए बड़े आंदोलन चल पड़े है लेकिन भारत मे अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व इतना बढ़ गया है कि हिंदी और बाकी देशी भाषाएं अब दिवंगत होती जा रही है 

दुनिया के पांच महाशक्ति राष्ट्रों की पाठशालाओं मे कोई भी विदेशी भाषा अनिवार्य रूप मे नही पढाई जाती । हमारे यहां के बच्चो पर सिर्फ अंग्रेजी अनिवार्य रूप से नही लादी जाए.. 

अंगेजी भाषा को अनिवार्य रखकर हम हिंदी तथा अन्य स्थानीय भाषाओं को हम पतन की ओर ले जा रहे है 

आजकल दुनिया सिकुड़ गई है सभी देशों मे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति आवागमन काफी बढ़ गया है इसलिए इस से जुड़े लोगो को विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है हमारे बच्चो को विदेशी भाषाएं सीखने की छूट हो उनपर जबरदस्ती अंग्रेजी लादी न जाए ... 

 महात्मा गांधी ने कहा था कि "यदि मै तानाशाह होता तो आज ही विदेशी भाषा मे शिक्षा देना बंद कर देता । जो अध्यापक आनाकानी करते उन्हे बर्खास्त कर देता

गुरू गोवलकर ने कहा था कि " आज देश की दुर्दशा यह है कि अंग्रेजी प्रमुख भाषा बन बैठी है और सब भाषाएं गौण बन गई है"..

जब संयुक्त राष्ट्र में अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज ने हिंदी में अपनी बात रखी थी तो पूरा देश गर्व से झूम उठा था ।

हिंदी बहुत प्यारी भाषा है इसका सम्मान करें हर कोई अपने लोगों से अपनी भाषा में बात करें मगर पूरा देश एक भाषा में बात करें।

वो भाषा होगी हिंदी ... न की अंग्रेजी।


यदि हम स्वतंत्र राष्ट्र है तो अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी लानी होगी हिंदी की जगह अंग्रेजी को प्राथमिकता देना बिल्कुल भी तर्कसंगत नही है


पहाड़न की डायरी से.....

🖋🖋 पूजा





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